भारत के विधि आयोग ने 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' यानी समान नागरिक संहिता को लेकर आम लोगों की राय माँगी है।
इसके लिए आयोग ने प्रश्नावली जारी की है. इसमें कुल मिलाकर 16 बिंदुओं पर राय माँगी गयी है. मगर, पूरा फोकस इस बात पर है कि क्या देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान संहिता होनी चाहिए?
इस बहस में सबसे खास बात ये है कोई ये जानना नहीं चाहता की उन 16 बिंदुओं पूछा क्या गया है जबकि तीन तलाक इन 16 बिंदुओं में से 7 वे नंबर का एक बिंदुओं है लेकिन सम्पूर्ण बहस सिर्फ 7 वे नंबर के बिंदुओं पर चल रही है और लोग तलाक को लेकर ज्ञान बटने में लगे है. इस बहस का मीडिया और सरकार बखूबी फायदा उठा रही है मीडिया को भरपूर TRP के लिए तमाशा मिल रहा है और इस बहस से आम जनता को फायदा हो न हो लेकिन सरकार गरिबी , भुखमरी , कुपोषण , बेरोज़गारी , महंगाई , परेशान बदहाल किसान जैसे ज़रूरी मुद्दों से ध्यान हटाने में सफल हुई है. इस बहस से सरकार उत्तरप्रदेश चुनाव में 30 महीनो के कार्यकाल के जवाब देने से भी बच गई ।
अब सरकार से कोई महंगाई और रोज़गार जैसे मुद्दों पर सवाल ही नहीं कर रहा है ।
देश को सोचना चाहिये हमें पहले 'Uniform Health Code' और 'Uniform Hunger Code' बनाना चाहिये या UCC क्युकी देश में लोग भूख और समय पर डॉक्टर न मिलने से ज्यादा मरते हैं।
मेरा आपसे निवेदन है इन 16 बिंदुओं को पढ़े और सोचे देश के लिए गरिबी , भुखमरी , कुपोषण , बेरोज़गारी , महंगाई , किसानो के लिए लड़ना ज़रूरी है या 'यूनिफॉर्म सिविल कोड'
मीडिया जो चौथा स्तम्भ है उसे भी TRP के अलावा अपनी ज़िम्मेदारी समझना किये आज देश के लिए ज़रूरी मुद्दे क्या है ???
क्या 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' की बहस आज गरिबी , भुखमरी , कुपोषण , बेरोज़गारी , महंगाई , किसानो से बढ़कर है ???
इचछुक धार्मिक समूह , सामाजिक समूह , अल्पसंख्यक समूह , गैर सरकारी संगठन, राजनेतिक दाल , पहल करने वाली सिविल सोसाइटी तथा सरकारी अभ्यारण , 45 दिन की अवधि के भीतर भारत का विधि आयोग , चौदहवां तल, एच.टी हॉउस, कस्तूरबा गांधी मार्ग, नई दिल्ली - 110001 को डाक द्वारा या ईमेल द्वारा lci-dla@nic.in पर अपने अभिमत प्रस्तुत कर सकते है ।








